छत्तीसगढ़
जब भी किसी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों, योजनाओं या पंचायत की राशि को लेकर कोई मामला सामने आता है, तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
शौचालय निर्माण, प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, सड़क निर्माण, नाली सफाई, जल योजना और स्ट्रीट लाइट जैसे विकास कार्यों में यदि शिकायत सामने आती है, तो सिर्फ कागजी रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए।
जांच में यह देखा जाना चाहिए कि जिस काम के लिए राशि स्वीकृत हुई, वह वास्तव में जमीन पर हुआ है या नहीं, काम की गुणवत्ता कैसी है और सरकारी राशि का उपयोग निर्धारित कार्य में हुआ है या नहीं।
वहीं, किसी भी सरपंच, सचिव या संबंधित अधिकारी पर आरोप साबित होने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
क्योंकि पंचायत की राशि जनता की राशि है और जनता के पैसों का हिसाब भी जनता के सामने पारदर्शी होना चाहिए।
सवाल यही है—जब भी पंचायत से जुड़ा कोई मामला सामने आएगा, क्या निष्पक्ष जांच कर जमीनी सच्चाई सामने लाई जाएगी?
